अकेलापन एक ऐसा एहसास है जो दिल की गहराइयों को छू जाता है। यह शायरी उसी तन्हाई और उदासी को बयां करती है:
साथ हैं सब मगर दिल क्यों अकेला सा लगता है।
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ये भी शायद ज़िंदगी की एक अदा है दोस्तों,
जिसको कोई मिल गया वो और तन्हा हो गया।
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ख्वाहिशों की पोटली सिर लिए चल रहा हूँ,
मैं अकेला ही अपनी मंजिल की ओर चल रहा हूँ।
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पता है हमारी सबसे बड़ी गलतफहमी क्या है,
यही कि हमें लगता है सब अपने ही हैं।
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बहुत कुछ है कहने को पर ना जाने क्यों,
अब कुछ ना कहूँ वही बेहतर लगता है।
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कितनी आसानी से छोड़ दिया तुमने,
बात करना जैसे सदियों से तुझ पर बोझ थे हम।
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जब जरूरत थी मैं सबका था,
जब मुझे थी तब मेरा कोई नहीं था।
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बिछड़ने का तो वो पहले ही इरादा कर चुके थे,
उन्हें तो बस मेरी तरफ से कोई बहाना चाहिए था।
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कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम,
तुम्हारे बगैर अगर तुम देख लेते तो,
कभी तन्हा न छोड़ते मुझे।
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अकेले ही सहना, अकेले ही रहना होता है,
अकेलेपन का हर एक आँसू, अकेले ही पीना होता है।
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शौक ही नहीं रहा कि अब मैं ख़ुद को साबित करूं,
अब तो आप जो समझ लें, बस वही हूँ मैं।
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अकेलापन तो पहले भी था जिंदगी में,
अब कुछ ज्यादा ही महसूस होने लगा है।
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कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी,
हजारों लोग हैं मगर कोई उस जैसा नहीं है।
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बहुत शौक था दूसरों को खुश रखने का,
होश तो तब आया, जब खुद को अकेला पाया।
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कोई कभी अकेला हो नहीं सकता,
जब वो अकेला होता है, तो अकेलापन उसके साथ होता है।
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गलत तो नहीं थे हम,
पर खुद को सही साबित नहीं कर पाए।
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देख ली हमने जमाने की यारी,
मतलब निकल जाने के बाद दूर हो जाते हैं बारी-बारी।
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कड़वा है लेकिन सच है,
जब इंसान की ज़रूरत बदल जाती है,
तो उसका बात करने का तरीक़ा भी बदल जाता है।
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इंसान को अपनी औकात का,
तब पता चलता है,
जब उसे वहां से ठोकर मिले,
जहां उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया हो।
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बुरे नहीं हैं हम,
बस सबको अच्छे नहीं लगते।
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मैंने खामोश रहकर देखा है,
लोग अक्सर भूल जाते हैं।
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तुम दिल तोड़ो और हम माफ कर दें,
ऐसा हर बार तो नहीं होगा हमसे।
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जिन्हें पता है अकेलापन क्या होता है,
वो दूसरों के लिए हमेशा हाज़िर रहते हैं।
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मैं जितना लोगों को समझता गया,
अकेलापन और भी अच्छा लगता गया।
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सपने तो टूटे थे ही अब तो,
अपनों ने भी साथ छोड़ दिया।
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अगर बेवफा होता तो भीड़ होती,
वफादार हूँ इसलिए अकेला हूँ।
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सब को दिलासा देने वाला शख्स,
अपने दुखों में अकेला होता है।
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सफर मुश्किल है,
मगर काटेंगे अकेले ही।
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तेरे जाने के बाद मैंने कितनों को यूँ आजमाया है,
मगर कोई भी मेरे इस अकेलेपन को दूर नहीं कर पाया है।
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अपने ही लोग लूट लेते हैं,
वरना गैरों को क्या मालूम कि दिल की दीवार कहाँ से कमजोर है।
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क्या कहें जनाब कि अकेलापन क्यों इतना भाता है,
खुद से बातों में अक्सर यूँ ही वक्त गुजर जाता है।
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खता है दिल से याद करो तो ख़ुदा भी मिल जाता है,
हमने तो तुम्हें दिल में बसा रखा है फिर भी अकेले हैं।
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यहाँ और भी खूबसूरत अकेलेपन पर शायरियाँ हैं जो तन्हाई के एहसास को बयां करती हैं:
अकेले ही सफर करना पड़ता है इस दुनिया में,
लोग बस कहने को साथ होते हैं!
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जो दर्द देता है वही दवा भी देता है,
अकेलापन भी सुकून देता है और सजा भी देता है!
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कभी तन्हाई को गले लगा कर देखो,
हर दर्द अपना सा लगेगा!
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तेरी यादें, तेरा गम, तेरा एहसास बाकी है,
अकेलेपन में भी तुझसे बात बाकी है!
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साथ चलने की क्या बात करते हो,
मैंने तन्हाई को अपना बना लिया है!
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मैं तन्हा जरूर हूँ मगर उदास नहीं,
अपने फैसलों से कभी निराश नहीं!
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लोग कहते हैं कि मैं अकेला हूँ,
पर उन्हें क्या पता कि मुझे सुकून मिला है!
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अकेलेपन से मत डरो,
यह तुम्हें खुद से मिलाने का जरिया है!
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कभी अकेले बैठकर सोचना,
तुम्हें अपना सबसे अच्छा साथी खुद ही मिल जाएगा!
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तूने ही सिखाया था कैसे जिया जाता है,
अब देख तन्हाई से कैसे निभाया जाता है!
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अकेलापन एक एहसास नहीं, बल्कि एक गहरी कहानी है जो हर किसी के दिल में बस जाती है। यहाँ कुछ और खूबसूरत शायरियाँ हैं जो अकेलेपन के दर्द और सुकून को बयां करती हैं:
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मैंने तन्हाई को अपना हमसफ़र बना लिया,
अब भीड़ में भी अकेला ही नजर आता हूँ!
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बहुत अजीब हैं ये दुनिया के मेले,
यहाँ भीड़ तो बहुत है, पर लोग अकेले!
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अकेलेपन की भी अपनी ही एक शान होती है,
सभी रिश्तों से ऊपर इसकी पहचान होती है!
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कौन अपना, कौन पराया, कोई नहीं समझता,
जब टूटता है दिल, तब अकेलापन ही समझता है!
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तन्हाई में जीना सीख लिया मैंने,
अब किसी के साथ की ख्वाहिश नहीं करता!
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हर शख्स अपनी तन्हाई को खुद ही सहता है,
क्योंकि दुनिया सिर्फ कहने को साथ होती है!
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अकेलापन कोई नहीं समझ सकता,
जिस पर बीतती है, बस वही जान सकता है!
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तन्हाई में अक्सर दिल से बातें होती हैं,
कभी शिकवे, कभी यादों की बरसात होती हैं!
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अकेलापन भी एक जुदा सा नशा है,
जो लग जाए तो दुनिया फीकी लगती है!
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तेरी जुदाई में ये हाल हो गया है,
कि अब तन्हाई से भी प्यार हो गया है!
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जिनसे हम बहुत उम्मीद रखते हैं,
अक्सर वही हमें अकेला छोड़ जाते हैं!
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रात की तन्हाई में अक्सर डर लगता है,
पर अकेले रहने की आदत हो गई है अब!
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तूने छोड़ा तो जाना अकेलापन क्या होता है,
अब हर शख्स में बेवफाई नजर आती है!
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अपनों की भीड़ में भी अकेला महसूस होता है,
शायद अब तन्हाई ही मेरी सबसे अच्छी दोस्त है!
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अकेलापन भी जरूरी है कभी-कभी,
यह हमें खुद से मिलाने का मौका देता है!
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हम अकेले ही अच्छे हैं,
कम से कम किसी के बदल जाने का डर तो नहीं है!
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कभी-कभी तन्हाई ही बेहतर होती है,
कम से कम कोई झूठे दिलासे तो नहीं देता!
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हर दर्द की दवा वक्त होता है,
पर अकेलेपन की कोई दवा नहीं!
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बहुत तकलीफ देता है अकेलापन,
पर यही सिखाता है कि कौन कितना अपना है!
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लोग कहते हैं अकेलापन अच्छा नहीं होता,
पर मुझे इसमें अब सुकून मिलता है!